बरेली में डीएम के आदेश की उड़ीं धज्जियां: मणिनाथ और सुभाषनगर में ओवररेटिंग, सुबह 6 बजे से बिक रही शराब

बरेली के सुभाषनगर और मणिनाथ क्षेत्र में शराब दुकानों पर तय समय से पहले बिक्री और ओवररेटिंग का खेल जारी है। डीएम अविनाश सिंह के निर्देश के बाद भी आबकारी विभाग चुप्पी साधे बैठा है।

बरेली में डीएम के आदेश की उड़ीं धज्जियां: मणिनाथ और सुभाषनगर में ओवररेटिंग, सुबह 6 बजे से बिक रही शराब
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डीएम का फरमान हवा: बरेली के सुभाषनगर और मणिनाथ में सुबह 6 बजे से छलक रहे जाम, 70 का 'पुआ' 100 में

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बरेली। जिला प्रशासन के आदेश ताक पर हैं और आबकारी विभाग की चुप्पी से 'शराब सिंडिकेट' के हौसले बुलंद हैं। स्मार्ट सिटी बरेली के मणिनाथ और सुभाषनगर (बदायूं रोड) इलाके में शराब ठेकेदारों की दबंगई इस कदर हावी है कि न तो दुकानों के खुलने का समय तय है और न ही शराब की बोतल पर लिखी कीमत। स्थानीय पार्षद और आम जनता की चीख-पुकार के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सुबह 6 बजे से आधी रात तक 'खुला दरबार'

वार्ड मेंबर और स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि सुभाषनगर थाना क्षेत्र में सुबह 6 बजते ही शराब की बिक्री शुरू हो जाती है, जो देर रात 12 बजे तक बेधड़क जारी रहती है। नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर समय सीमा से परे बेची जा रही शराब के कारण आसपास का माहौल पूरी तरह खराब हो चुका है।

70 रुपये का पुआ 100 में, जेब पर डाका

दुकानों पर खुलेआम 'ओवररेटिंग' का खेल चल रहा है। आरोप है कि जिस शराब के पुए की सरकारी कीमत 70 रुपये है, उसे दुकान खोलकर 100 रुपये में वसूला जा रहा है। विरोध करने पर ग्राहकों के साथ बदसलूकी की जाती है। यह पूरी वसूली किसके इशारे और शह पर हो रही है, यह अब बड़ा सवाल बन चुका है।

डीएम अविनाश सिंह का आदेश भी बेअसर!

शिकायतें जब जिला मजिस्ट्रेट तक पहुंचीं, तो डीएम अविनाश सिंह ने आबकारी अधिकारी को टेलीफोन कर समय सीमा का उल्लंघन करने वाली और ओवररेटिंग करने वाली दुकानों पर सख्त कार्रवाई का हुक्म सुनाया। लेकिन अफसोस! डीएम साहब के कड़े निर्देशों की धज्जियां आबकारी विभाग के ढुलमुल रवैये की बदौलत उड़ रही हैं।

आबकारी विभाग का 'मौन व्रत'

मामले में जब जिला आबकारी अधिकारी से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने साफ तौर पर कुछ भी बयान देने से इनकार कर दिया। आबकारी विभाग का यह 'मौन' अपने आप में कई संदिग्ध इशारे कर रहा है। जनता पूछ रही है—क्या आबकारी महकमा ठेकेदारों के आगे नतमस्तक हो चुका है, या फिर इस काली कमाई की गूंज बहुत दूर तक जा रही है।