बलिया: बांसडीह इंटर कॉलेज में 29.5 लाख का बड़ा छात्रनिधि घोटाला! DIOS और प्रभारी प्रधानाचार्य के 'सिंडिकेट' पर उठे सवाल, IGRS की फर्जी आख्या खारिज करने की मांग

बलिया के बांसडीह इंटर कॉलेज में छात्रनिधि कोषों (स्पोर्ट्स, स्काउट, रेडक्रॉस, साइंस आदि) से करीब 29,53,642 रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि डीआईओएस और जांच अधिकारियों की मिलीभगत से आईजीआरएस (IGRS) पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद फर्जी निस्तारण आख्या लगाकर मामले को दबा दिया गया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच, एफआईआर और भू-राजस्व की भांति वसूली की मांग की है। पढ़ें पूरी खोजी रिपोर्ट।

बलिया: बांसडीह इंटर कॉलेज में 29.5 लाख का बड़ा छात्रनिधि घोटाला! DIOS और प्रभारी प्रधानाचार्य के 'सिंडिकेट' पर उठे सवाल, IGRS की फर्जी आख्या खारिज करने की मांग

सरकारी धन की लूट पर 'आख्या' का पर्दा! बांसडीह इंटर कॉलेज में 29.5 लाख का छात्रनिधि घोटाला; सबूत के बाद भी IGRS पर लगा फर्जी निस्तारण

जनवार्ता लाइव

 बलिया:

बलिया के बांसडीह इंटर कॉलेज में छात्रों के भविष्य और विकास के लिए सुरक्षित 'छात्रनिधि कोष' में करीब 29.53 लाख रुपये (₹29,53,642) की खुली डकैती का मामला गरमा गया है। आरोप है कि प्रभारी प्रधानाचार्य, चुनिंदा कर्मचारियों, फर्जी आपूर्तिकर्ताओं और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा सिंडिकेट संचालित हो रहा है। हद तो तब हो गई जब साक्ष्य देने के बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने आईजीआरएस  पोर्टल पर आंख मूंदकर फर्जी निस्तारण आख्या अपलोड कर दी।

सबूत जमा किए, पर IGRS पर लिख दिया— "नहीं मिला साक्ष्य"

शिकायतकर्ता सतीश कुमार सिंह के अनुसार, आईजीआरएस संदर्भ संख्या 30097925000983 पर तत्कालीन डीआईओएस देवेंद्र कुमार गुप्ता द्वारा 23 दिसंबर 2025 को झूठी आख्या प्रेषित की गई कि 'शिकायतकर्ता ने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया'।

सच्चाई क्या है?

  • जांच अधिकारियों का पत्र (दिनांक 16.12.2025) शिकायतकर्ता को 21.12.2025 को प्राप्त हुआ।

  • शिकायतकर्ता ने 23.12.2025 को ही डीआईओएस कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बैंक डिटेल्स, शासनादेश और शपथपत्र जमा करा दिया था।

  • लेकिन, उसी दिन (23.12.2025) बिना किसी भौतिक सत्यापन या कागजातों को पढ़े, एकतरफा फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामला दबा दिया गया। मुख्य शिकायत से ध्यान भटकाने के लिए चांद जी सिंह नामक अन्य व्यक्ति की शिकायत को जबरन इसके साथ टैग कर दिया गया।

मद-वार गबन का पूरा लेखा-जोखा (कुल गबन: ₹29,53,642)

छात्रों की जेब से वसूले गए शुल्क को बिना ई-निविदा (E-Tender) और नियमों को ताक पर रखकर परिचारकों, रिश्तेदारों और चहेती फर्मों के खातों में ट्रांसफर किया गया:

  • विज्ञान शुल्क (₹9,71,524): बिना किसी टेंडर/विज्ञापन के प्रशांत साइंटिफिक, रेखा जायसवाल आदि को अवैध भुगतान।

  • क्रीड़ा शुल्क (₹7,85,688): खेल शिक्षक की बिना किसी मांग के और बिना खेल सामग्री खरीदे परिचारकों व चहेतों को बांटी गई राशि।

  • स्काउट कोष (₹4,80,810): बिना ई-निविदा परिचारक (योगेंद्र राम), रिश्तेदार (गोविंद पांडेय) और दुकानदारों को सीधा भुगतान।

  • निर्धन छात्र कोष (₹2,56,000): गरीब छात्रों के आवेदन व आय प्रमाण पत्र के बिना सीधे परिचारक योगेंद्र राम अकेले को ₹1.63 लाख से अधिक दिए गए।

  • रेडक्रॉस कोष (₹2,53,600): नियमानुसार 50% राज्यांश जमा न करके निजी सर्जिकल फर्मों और परिचारकों में बांट दिया गया।

  • पत्रिका शुल्क (₹1,50,000): 1 माह के भीतर परिचारक सुभाष (1.20 लाख) और प्रधानाचार्य के निजी 'केडी पब्लिक स्कूल' के कर्मचारी अरविंद पांडेय (30 हजार) को भुगतान।

  • काशनमनी कोष (₹73,000): पासआउट छात्रों को लौटाने के बजाय परिचारकों के नाम चेक काटकर हड़पा गया।

  • कोरोना काल के नियमों की धज्जियां: शासनादेश का उल्लंघन कर शिक्षक दिवस आदि के नाम पर बच्चों से अवैध वसूली की गई। 

  • 'निस्तारण का रेट तय!'— डीआईओएस दफ्तर की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

जनपद में यह चर्चा आम है कि डीआईओएस कार्यालय में फर्जी निस्तारण का 'रेट' बढ़ा दिया गया है। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. हरेराम पांडेय के प्रकरण में भी तत्कालीन डीआईओएस देवेंद्र गुप्ता ने पर्याप्त सबूतों के बावजूद भ्रष्टाचारियों से सांठगांठ कर एकतरफा निस्तारण कर दिया था। अब वर्तमान डीआईओएस मनोज कुमार मिश्रा भी उसी ढर्रे पर चलते दिख रहे हैं।

जिलाधिकारी से प्रमुख मांगें:

  1. डीआईओएस की कूटचरित व फर्जी आख्या (दिनांक 23.12.2025) को तत्काल निरस्त किया जाए।

  2. शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या ADM (वित्त/राजस्व) की अध्यक्षता में निष्पक्ष जांच समिति का गठन हो।

  3. दोषी प्रधानाचार्य, कर्मचारियों, फर्जियों और इसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज हो।

  4. गबन किए गए ₹29,53,642 की वसूली भू-राजस्व (Land Revenue) की भांति की जाए।

  5. विद्यालय के भौतिक स्टॉक का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए।