इस्तीफा ड्रामा, उगाही और फर्जीवाड़ा!' पूर्व PCS अलंकार अग्निहोत्री पर सहयोगियों का बड़ा धमाका, पार्टी-ट्रस्ट के नाम पर ठगी के गंभीर आरोप

पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' में बड़ा बवंडर खड़ा हो गया है। पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा देकर अग्निहोत्री पर चंदा चोरी, फर्जीवाड़ा, टिकट बेचने और सवर्ण समाज को धोखा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस्तीफा ड्रामा, उगाही और फर्जीवाड़ा!' पूर्व PCS अलंकार अग्निहोत्री पर सहयोगियों का बड़ा धमाका, पार्टी-ट्रस्ट के नाम पर ठगी के गंभीर आरोप
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साला पंडित पागल हो गया है' से लेकर चिटफंड की तरह उगाही तक... पूर्व PCS अलंकार अग्निहोत्री की 'राम' पार्टी में महासंग्राम!

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बरेली।

 यूजीसी नियमों के विरोध और संतों के अपमान का हवाला देकर सरकारी सेवा से इस्तीफा देने वाले पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM) के शीर्ष पदाधिकारियों और पूर्व जिलाध्यक्षों ने सामूहिक रूप से मोर्चा खोलते हुए अलंकार अग्निहोत्री पर धोखाधड़ी, राजनीतिक स्टंटबाजी, फर्जीवाड़े और वित्तीय हेराफेरी के कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

संगठन के अध्यक्ष केशव शंखधार, पूर्व ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष अजय शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष आर्येंद्र मिश्रा और पूर्व महानगर अध्यक्ष एकांश गुप्ता सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफे की झड़ी लगाते हुए एक साझा प्रेस नोट जारी किया है।

इस्तीफा यूजीसी विरोध नहीं, राजनीतिक स्टंट: पदाधिकारियों का दावा है कि डीएम आवास से निकलकर खुद को पीड़ित बताना एक सोची-समझी साजिश थी। असल में इस्तीफा देने की पटकथा 6 महीने पहले ही तय हो चुकी थी। 28 दिसंबर 2025 को ही उन्होंने अपने आवास पर 25-30 लोगों के सामने इस्तीफे की पेशकश की थी।

ट्रस्ट और पार्टी के नाम पर चिटफंड जैसा खेल: मथुरा में पंजीकृत 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा RAM ट्रस्ट' के नाम पर राजनीतिक दल चलाया जा रहा है। आरोप है कि फर्जी राजनीतिक पार्टी के नाम पर जुटाया गया चंदा ट्रस्ट के निजी खातों में जमा कराया जा रहा है।

महिलाओं पर विवादित टिप्पणी और अभद्रता को बढ़ावा: नेताओं ने आरोप लगाया कि महिला कार्यकर्ताओं के साथ गलत व्यवहार की शिकायत करने पर अलंकार अग्निहोत्री ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और आरोपी पदाधिकारियों को सजा देने के बजाय प्रदेश टीम में प्रमोट किया।  

टिकट के नाम पर लाखों की उगाही: जिलाध्यक्षों से प्रति माह 1 लाख रुपये वसूली का दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही प्रत्याशी बनाने के नाम पर 2 लाख रजिस्ट्रेशन फीस और 10 लाख रुपये टिकट का रेट तय किया गया था।

सवर्ण आंदोलन से विश्वासघात: प्रेस नोट में कहा गया कि सवर्णों के नाम पर राजनीति करने वाले अग्निहोत्री ने जंतर-मंतर पर सवर्ण आंदोलन का विरोध किया और कार्यकर्ताओं को आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों से दूर रहने की हिदायत दी। 7 सितंबर 2026 को बरेली में आयोजित "सामान्य महापंचायत" में शामिल होने का आग्रह करने पर कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकालने की धमकी तक दी गई।

विदेशी फंडिंग का दावा: नेताओं ने आशंका जताई है कि संगठन में कनाडा और सऊदी अरब से संदेहास्पद रकम आ रही है, जिसे लेकर ये लोग कभी भी बड़ा वित्तीय घोटाला कर फरार हो सकते हैं।

पूर्व पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि संगठन का कोई विजन डॉक्यूमेंट नहीं है, बल्कि यह सिर्फ अलंकार अग्निहोत्री की निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा (MLC या विधायक बनने) का जरिया बनकर रह गया था।