17.34 लाख डकार कर सोया PWD! दामोदर पार्क सौंदर्यीकरण की प्रगति रिपोर्ट ‘गायब’, DM के सख्त आदेश भी बेअसर

बरेली में सेठ दामोदर स्वरूप पार्क तिराहे के सौंदर्यीकरण के लिए मंजूर ₹17.34 लाख कहाँ खर्च हुए? DM के आदेशों के बावजूद PWD ने न तो प्रगति रिपोर्ट दी और न ही यूटिलिटी सर्टिफिकेट। जानिए सरकारी खजाने के पैसों पर PWD की चुप्पी की पूरी कहानी।

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बरेली।

शहर को चमकाने और पहचान दिलाने के नाम पर सरकारी खजाने का मुंह तो खोल दिया गया, लेकिन जब जनता के पैसों का हिसाब मांगने की बारी आई, तो लोक निर्माण विभाग (PWD) ने चुप्पी की चादर ओढ़ ली। सेठ दामोदर स्वरूप पार्क तिराहे के सौंदर्यीकरण के लिए जारी हुए ₹17.34 लाख रुपये की वित्तीय और भौतिक प्रगति रिपोर्ट गायब है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिलाधिकारी (DM) के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बावजूद PWD का 'जवाबदेही का ताला' अब तक नहीं टूटा है।

टेंडर से लेकर रिपोर्ट तक सवालों के घेरे में

सेठ दामोदर स्वरूप पार्क शहर की आस्था और पहचान का केंद्र है। राहगीरों को बेहतर सुविधाएं देने और तिराहे को नया लुक देने के इरादे से यह योजना पास की गई थी। शुरुआत में तो टेंडर प्रक्रिया को लेकर 'घोड़े दौड़ाए' गए, लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद फाइलें दफ्न हो गईं। न समय पर काम का ब्योरा दिया गया और न ही काम पूरा होने का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utility Certificate) जमा किया गया।

DM के आदेशों को PWD ने दिखाया ठेंगा

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, जिलाधिकारी ने हर महीने योजना की वित्तीय और भौतिक स्थिति की रिपोर्ट भेजने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद PWD की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। नौबत यहाँ तक आ पहुँची कि अर्थ एवं संख्याधिकारी को पत्र लिखकर विभाग को उसकी जिम्मेदारी याद दिलानी पड़ी।

विकास का दुश्मन धन नहीं, जवाबदेही की कमी

जनता का एक-एक रुपया मेहनत की कमाई है। रंग-बिरंगे होर्डिंग्स और शिलान्यास के पत्थरों से विकास नहीं नापा जाता, बल्कि पारदर्शिता और समयबद्ध हिसाब से तय होता है। ₹17.34 लाख जारी होने के बाद भी PWD का रिपोर्ट दबाकर बैठ जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

क्या सरकारी आदेश अब सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह गए हैं?

क्या जनता के पैसों का हिसाब देना PWD के लिए महज़ एक औपचारिकता है?

अब देखने वाली बात यह होगी कि PWD की नींद खुलती है और वह लंबित रिपोर्ट सामने लाता है, या फिर यह योजना भी बाकी फाइलों की तरह धूल फांकती रह जाएगी।