सरकारी फाइल को मृत्युदंड!’: कृषि विभाग में करोड़ों की मलाई खाने वाले बाबू का बड़ा खेल, जांच शुरू होने से पहले ही गायब कर दी पत्रावली

बरेली के उप निदेशक कृषि कार्यालय में वरिष्ठ सहायक अनुराग पालीवाल के भ्रष्टाचार का नया कारनामा सामने आया है। यंत्रीकरण योजना में 50% कमीशनखोरी और वसूली गैंग चलाने के आरोपों की जांच जैसे ही पूरी हुई, साहब ने कार्रवाई से बचने के लिए जांच फाइल को ही ‘मृत्युदंड’ दे दिया (गायब कर दिया)। सीडीओ और कृषि निदेशक कार्यालय में अब ठीकरा फोड़ने का खेल जारी है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

सरकारी फाइल को मृत्युदंड!’: कृषि विभाग में करोड़ों की मलाई खाने वाले बाबू का बड़ा खेल, जांच शुरू होने से पहले ही गायब कर दी पत्रावली
जनवार्ता लाइव

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बरेली।

कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन बरेली के कृषि विभाग में एक ऐसा बाबू निकला जिसने कार्रवाई के चाबुक से बचने के लिए कानून के ‘हाथों की फाइल’ ही गायब कर दी! जी हां, उप निदेशक कृषि कार्यालय (बिल्वा) में तैनात वरिष्ठ सहायक अनुराग पालीवाल पर जब भ्रष्टाचार की जांच की तलवार लटकी, तो उसने कार्रवाई से ठीक पहले जांच पत्रावली को ही ‘मृत्युदंड’ दे दिया। अब जब शासन के निर्देश पर फाइल तलाशी जा रही है, तो दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है और फाइल नदारद है।

यंत्रीकरण योजना में 50% कमीशन की ‘मलाई’

मामला कृषि यंत्रीकरण योजना में बड़े पैमाने पर हुई बंदरबांट से जुड़ा है। आरोप है कि वरिष्ठ सहायक अनुराग पालीवाल ने एक सिंडिकेट (गैंग) बना रखा था। उसने नियम-कायदों को ताक पर रखकर 50 प्रतिशत तक कमीशन खाया और अपात्रों को सरकारी सब्सिडी बांट दी। भुता के एक पति-पत्नी को नियम विरुद्ध तरीके से कृषि यंत्र देकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। बहेड़ी के राजकमल ने जब इस महाघोटाले की शिकायत शासन में की, तब जाकर मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

जांच पूरी हुई, तो गायब हो गई पत्रावली

जिलाधिकारी के आदेश पर गठित जांच कमेटी (जिसमें पीडी, लेखा अधिकारी और डीआईओएस कार्यालय के वित्त एवं लेखा अधिकारी राम आसरे शामिल थे) ने जांच पूरी कर 19 जुलाई 2025 को अपनी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को भेजी थी। लेकिन, इससे पहले कि गाज गिरती, शातिर बाबू ने पूरी पत्रावली ही गायब करवा दी। बुधवार को जब शासन के आदेश पर फाइल की खोजबीन शुरू हुई, तो पूरा प्रशासनिक अमला हाथ मलता रह गया।

वसूली का गैंग: अधिकारी से ऐंठ लिए 2.80 लाख रुपये

चर्चा है कि आरोपी बाबू का रसूख इतना था कि उसने विभाग के अंदर ही एक खौफनाक वसूली नेटवर्क खड़ा कर रखा था। जो अधिकारी या कर्मचारी उसकी बात नहीं मानता या पैसे नहीं देता, उसे फर्जी मामलों में फंसाकर कार्रवाई करवा दी जाती थी। हद तो तब हो गई जब विभाग के ही एक अधिकारी से 2 लाख 80 हजार रुपये की रंगदारी वसूल ली गई।

अफसरों में खींचतान, ठीकरा फोड़ने की होड़

फाइल गायब होने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। सीडीओ कार्यालय अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए संयुक्त कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश में है। हालांकि, संयुक्त कृषि निदेशक की कार्यशैली पर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि शासन ‘मृत्युदंड’ पा चुकी फाइल को दोबारा जिंदा करके दोषी बाबू और उसके मददगार अफसरों पर क्या सख्त एक्शन लेता है।