बरेली कैंट में नेताओं का 'रील युद्ध': सपा-भाजपा के दावेदारों में मुख्य अभिनेता बनने की होड़, सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक दिलचस्प जंग

बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी और भाजपा के दावेदारों के बीच दिलचस्प राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। रील्स, सर्वे और सोशल मीडिया वॉर के बीच जनता इस पूरे सियासी ड्रामे के मजे ले रही है।

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कैमरे का क्रेज, रील्स का रार और टिकट का खुमार: बरेली कैंट में पोस्टर-सर्वे वार में उलझे दावेदार

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बरेली। 

बरेली कैंट विधानसभा सीट इन दिनों किसी चुनावी रणभूमि से ज्यादा किसी फिल्मी सेट जैसी नजर आ रही है, जहां हर दावेदार खुद को फिल्म का 'मेन हीरो' और बाकी प्रतिद्वंद्वियों को 'साइड रोल' में साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा। चुनाव का ऐलान भले ही दूर हो, लेकिन दावेदारों का उत्साह देखकर लगता है जैसे नामांकन का आखिरी दिन कल ही है।

कैंट के चुनावी समर में डिजिटल मीडिया और जमीनी सक्रियता का ऐसा तड़का लगा है कि चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। सुबह होते ही एक दावेदार का नया पोस्टर, दोपहर में खुद को अव्वल बताने वाला सर्वे और शाम को धमाकेदार रील सामने आ जाती है। एक खेमा अगर प्रतिद्वंद्वी की जनसंपर्क शैली को 'फोटो-शूट' बताकर निशाना साधता है, तो दूसरा खेमा उन्हें 'बिना बात ठहाके लगाने वाला नेता' करार देने में पीछे नहीं रहता। स्थिति यह है कि राजनीतिक सिद्धांतों की बहस की जगह अब मीम युद्ध ने ले ली है।

दूसरी ओर, क्षेत्र के परिपक्व मतदाता और राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के पाले में जहां पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन के प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव को लेकर जनता में गहरा जुड़ाव देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के खेमे में  पार्थ  के नए दृष्टिकोण और युवा ऊर्जा को लेकर राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज है।

डिजिटल जंग के इस दौर में अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों प्रमुख दलों का शीर्ष नेतृत्व किस चेहरे के सियासी वजन पर भरोसा जताता है—स्क्रीन पर दिखने वाली इस रीलबाजी पर या फिर जमीनी स्तर पर जनता के दिलों में बनी छवि पर।