'थाने में निकाह, 30 दिन में तीन तलाक!'—बरेली में खाकी के सामने हुआ 'सौदा'? साक्ष्य के बाद भी बेबस पीड़िता!
बरेली के थाना किला क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। पीड़िता आलिया का आरोप है कि पुलिस के सामने थाने में उसका निकाह कराया गया, लेकिन 30 दिन बाद पति ने तीन तलाक दे दिया। वीडियो सबूत होने के बावजूद पुलिस जांच से बच रही है। पढ़ें पूरी खबर।
जनवार्ता लाइव
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कानून के रखवालों की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 'अपराध मुक्त समाज' और 'महिलाओं को न्याय' का दावा करने वाली पुलिस खुद एक उलझे हुए और संदिग्ध मामले के घेरे में आ खड़ी हुई है। मामला थाना किला का है, जहां एक पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
थाने में बना रिश्ता, 30 दिन में टूटा
पीड़िता आलिया का आरोप बेहद चौंकाने वाला है। उसका कहना है कि जिस थाने का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, उसी थाना किला परिसर में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उसका निकाह कराया गया था। लेकिन शादी का यह बंधन महीने भर भी टिक न सका।
आलिया का दावा है कि शादी के महज 30 दिनों के भीतर उसके पति इमरान रजा खान ने उसे न सिर्फ छोड़ दिया, बल्कि गैर-कानूनी तरीके से 'तीन तलाक' देकर रिश्ते की इतिश्री भी कर दी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उस पर पहले दर्ज मुकदमों को वापस लेने का दबाव बनाया गया था और मुकदमे की कार्रवाई से बचने के लिए ही शादी को एक 'मोहरे' की तरह इस्तेमाल किया गया।
वीडियो सबूत मौजूद, फिर भी पुलिस दूर?
इस मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आता है जब पीड़िता पुलिस की मंशा पर सीधे सवाल उठाती है। आलिया का स्पष्ट कहना है कि उसके पास थाने में हुए निकाह का पूरा वीडियो साक्ष्य (Video Evidence) मौजूद है। वह जांच अधिकारी (IO) को यह वीडियो सौंपने के लिए तैयार है, लेकिन आरोप है कि पुलिस इस ठोस सबूत को केस की विवेचना (Investigation) में शामिल ही नहीं कर रही है।
अब सवाल यह उठता है कि:
आखिर पुलिस उस वीडियो को केस डायरी का हिस्सा बनाने से क्यों कतरा रही है?
क्या खाकी अपनी ही मौजूदगी में हुए इस निकाह की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहती है?
क्या विवेचना केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित कर दी गई है?
उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार
अपने साथ हुए इस छल और पुलिस के ढुलमुल रवैये से आहत होकर आलिया ने अब पुलिस के उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। उसने प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निकाह के वीडियो को मुकदमे में साक्ष्य के तौर पर शामिल करने और दोषी पति व उसके मददगारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, गेंद अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के पाले में है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या खाकी अपने ऊपर लगे इन दागों को धोते हुए पीड़िता को इंसाफ दिला पाती है या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।
(नोट: प्रस्तुत समाचार पीड़िता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और उसके आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस पक्ष आते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)