बरेली में मूंगफली का 'अदृश्य' खेल: बिना बोए उगी 75 लाख की फसल, कागजों पर लहलहाए खेत!

बरेली के कृषि विभाग में तबादला नीति को ताक पर रखकर गोदाम प्रभारियों के फेरबदल और 75 लाख रुपये की मूंगफली बीज वितरण धांधली पर एक तीखा व्यंग्य। जानिए कैसे कागजों में जीपीएस फोटो का 'जादू' चलाकर खेतों को हरा-भरा कर दिया गया।

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जनवार्ता लाइव

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रविंदर सिंह सूर्यवंशी, बरेली।

बरेली में कृषि विभाग के 'साहबों' ने विज्ञान के सारे नियमों को मात देते हुए एक नया कीर्तिमान रचा है। नियम कहते हैं कि तबादले जून तक हो जाने चाहिए, लेकिन सितंबर की सुहानी हवा में साहबों को अचानक 'वसूल-अदलू-बदलू' का ख्याल आ गया। जिन प्रभारियों ने 'तय चढ़ावा' समय पर अर्पित कर दिया, उनकी कुर्सी सुरक्षित रही; और जिन्होंने आनाकानी की, उन्हें 'नियम विरुद्ध' दरकिनार कर नए प्रभारियों पर दांव लगा दिया गया।

असली खेल तो तिलहन योजना के तहत आए 705 क्विंटल मुफ्त मूंगफली बीज में हुआ, जिसकी कीमत करीब 75 लाख रुपये है। वैसे तो पूरे बरेली जिले में आंवला और फरीदपुर के कुछ हिस्सों को छोड़कर मूंगफली ढूंढने से भी नहीं मिलती, लेकिन कागजी फाइलों में पूरा जिला मूंगफली की हरियाली से लहलहा उठा।

जब संयुक्त कृषि निदेशक ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा कि "मुझे मूंगफली के खेत में खड़े होकर जीपीएस फोटो खिंचवानी है," तो विभाग के जिम्मेदार अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। अब जब खेत में फसल हो, तब तो साहब खड़े होकर फोटो खिंचवाएं! नतीजा यह हुआ कि आंवला और फरीदपुर के गिने-चुने खेतों की अलग-अलग एंगल से तस्वीरें खींचकर पूरे जिले की 'फसल प्रदर्शन' फाइल तैयार कर ली गई।

आंदोलन की चेतावनी देने वाले एक 'किसान नेता' को भी रात के अंधेरे में 35 हजार रुपये का 'प्रसाद' मिला, जिसके बाद वे आंदोलन का नाम ही भूल गए। हटाए गए गोदाम प्रभारियों का दर्द भी छलक रहा है—मेहनत उन्होंने की, लेकिन अब भुगतान नए प्रभारियों के खातों में कराकर बंदरबांट की पूरी तैयारी है। सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे उप निदेशक और उनके सहयोगियों की जुगलबंदी ने जिले के किसानों की किस्मत को कागजी पन्नों में समेट दिया है। अब देखना यह है कि डीएम साहब की 'खसरा पड़ताल' से कागजों पर उगी यह मूंगफली बाहर आती है या फाइलों में ही हजम हो जाती है।