छात्रकोष पर 'डाका' और सच पर 'लीगल नोटिस'! बाँसडीह इंटर कॉलेज में 31.08 लाख के घपले पर डीआईओएस-प्रधानाचार्य का अनोखा 'मास्टरस्ट्रोक'

बलिया के बाँसडीह इंटर कॉलेज में छात्रनिधि कोष के 31.08लाख रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला। डीआईओएस की फर्जी आईजीआरएस आख्या और सच छापने वाले पत्रकारों को लीगल नोटिस भेजने वाले प्रभारी प्रधानाचार्य के सिंडिकेट पर विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

छात्रकोष पर 'डाका' और सच पर 'लीगल नोटिस'! बाँसडीह इंटर कॉलेज में 31.08 लाख के घपले पर डीआईओएस-प्रधानाचार्य का अनोखा 'मास्टरस्ट्रोक'
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जब कुर्सी पर बैठे 'साहब' ही बन जाएं 'शातिर खिलाड़ी': बाँसडीह के 31.08 लाख रुपये का 'डिजिटल डाका', हाईकोर्ट याचिका की फर्जी आख्या और लीगल नोटिस का स्वांग!

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बलिया।

बलिया का शिक्षा विभाग और बाँसडीह इंटर कॉलेज इन दिनों ईमानदारी, नैतिकता और शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा अद्भुत मॉडल पेश कर रहे हैं, जिस पर हरचंद जोशी या श्रीलाल शुक्ल भी लिखते तो शायद उनकी कलम भी शरमा जाती। मामला छात्रनिधि कोष के 31.08 लाख रुपये (31,08,642) के उस शासकीय 'डाके' का है, जिसमें नौनिहालों के खेल, विज्ञान, निर्धन कल्याण, स्काउट और विकास कोष के पैसों को कथित रूप से अपने चहेतों, परिचारकों और रिश्तेदारों की जेबों में उतार दिया गया।

लेकिन कहानी में असली 'मास्टरस्ट्रोक' केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के उस बेमिसाल हुनर का है, जिसे प्रभारी प्रधानाचार्य अनिल कुमार पाण्डेय और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक की जुगलबंदी ने अंजाम दिया है।

हाईकोर्ट की पुरानी याचिका का 'फर्जी सहारा' और आईजीआरएस का खेल

गबन की इस बड़ी फाइल को दबाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने जो कारनामा किया है, वह प्रशासनिक जालसाजी का नायाब नमूना है:

वर्ष 2019 का मामला बनाम 2022 के प्रधानाचार्य: बाँसडीह इंटर कॉलेज के प्रबंधक संजय कुमार सिंह द्वारा विकास कोष की जांच तत्कालीन उप-जिलाधिकारी बाँसडीह अन्नपूर्णा गर्ग द्वारा कराई गई थी। उस जांच में प्रबंधक संजय कुमार सिंह 18 लाख रुपये के गबन के दोषी पाए गए थे। इस दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए प्रबंधक ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका संख्या 23465/2019 दाखिल की थी, जो आज भी विचाराधीन है।

फर्जी आख्या से केस बंद: अनिल कुमार पाण्डेय ने 1 अप्रैल 2022 को प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्यभार ग्रहण किया। जाहिर है कि 2019 की याचिका का 2022 में बने प्रभारी प्रधानाचार्य अनिल कुमार पाण्डेय के कार्यकाल के वित्तीय गबन से कोई संबंध ही नहीं है। लेकिन डीआईओएस ने अपने चहेते प्रधानाचार्य को बचाने के लिए आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40019326035318 (अनिल कुमार पाण्डेय से संबंधित प्रकरण) पर इसी पुरानी याचिका (23465/2019) का फर्जी और कूटरचित उल्लेख करते हुए मामले को बंद कर दिया!

आईजीआरएस का 'जादू': इससे पहले भी शिकायतकर्ता सतीश कुमार सिंह द्वारा 23.12.2025 को डीआईओएस कार्यालय में प्रस्तुत बैंक डिटेल्स, शासनादेश और हलफनामे के बावजूद उसी दिन पोर्टल पर यह झूठी आख्या लगा दी गई थी कि "शिकायतकर्ता ने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया!" यही नहीं, पारदर्शिता का दम घोंटने के लिए मुख्य शिकायत में किसी अन्य व्यक्ति की अर्जी नत्थी कर मामले को खिचड़ी बना द