सचिवालय का आदेश ठेंगा पर! 12 साल से डीआईओएस कार्यालय पर 'कुर्सी जमाए' बैठे मास्टर साहब, 'रिमोट कंट्रोल' से चला रहे अपना स्कूल

बलिया जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में पिछले 12 वर्षों से जारी 'अतुलनीय' खेल का भंडाफोड़ हुआ है। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिसुकिया के सहायक अध्यापक अतुल कुमार तिवारी खुद तो डीआईओएस दफ्तर में बैठकर साहब गिरी चमका रहे हैं और अपना मूल विद्यालय 'रिमोट' से चला रहे हैं। सह-डीआईओएस और राजकीय इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों की मौजूदगी के बावजूद साहब की गैरमौजूदगी में कुर्सी संभालने का अनाधिकृत 'चार्ज' इन्हीं मास्टर साहब को मिलता है। शासनादेशों को ठेंगा दिखाकर जारी इस कुर्सी-मोह पर एक शिकायतकर्ता ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

सचिवालय का आदेश ठेंगा पर! 12 साल से डीआईओएस कार्यालय पर 'कुर्सी जमाए' बैठे मास्टर साहब, 'रिमोट कंट्रोल' से चला रहे अपना स्कूल
जनवार्ता लाइव।

बलिया।

कहते हैं सरकारी महकमों में 'जुगाड़' अगर पक्का हो, तो एक मामूली सहायक अध्यापक भी पूरे जिले के शिक्षा विभाग का 'शाहंशाह' बन सकता है! बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक  कार्यालय में कुछ ऐसा ही अद्भुत, अकल्पनीय और गैर-कानूनी नजारा पिछले 12 सालों से देखने को मिल रहा है।

यहाँ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिसुकिया के सहायक अध्यापक श्री अतुल कुमार तिवारी साहब का जलवा ऐसा है कि वे बच्चों को पढ़ाने के बजाय पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से डीआईओएस कार्यालय में जमघट लगाए हुए हैं। मास्टर साहब दफ्तर में बैठकर 'साहबगिरी' झाड़ते हैं और अपने मूल विद्यालय की कमान 'रिमोट कंट्रोल' से संचालित करते हैं—चाहे उससे बिसुकिया के नौनिहालों का भविष्य गर्त में ही क्यों न चला जाए!  

जब सह-डीआईओएस और प्रधानाचार्य 'अदृश्य' हो जाते हैं...

नियम-कानून कहते हैं कि डीआईओएस साहब की गैरमौजूदगी में दफ्तर की कमान सह-जिला विद्यालय निरीक्षक या किसी वरिष्ठ इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य संभालेंगे। बलिया में सह-डीआईओएस पद पर  ओम प्रकाश यादव तैनात हैं और शहर में तीन-तीन राजकीय इंटर कॉलेजों के योग्य प्रधानाचार्य मौजूद हैं। लेकिन धन्य हैं बलिया के डीआईओएस मनोज कुमार मिश्र! साहब जब भी बाहर जाते हैं, कुर्सी की चाबी अपने 'चहेते' मास्टर अतुल तिवारी को सौंप जातà