बांसडीह इंटर कॉलेज में फर्जीवाड़े का महा-विस्फोट: प्रबंधक और प्रभारी प्रधानाचार्य की तिकड़ी ने अपनों को बनाया बाबू और चपरासी!
बलिया के बांसडीह इंटर कॉलेज में 16 महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके प्रधानाचार्य के फर्जी दस्तखत और बैक-डेटिंग का बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रबंधक संजय कुमार सिंह, प्रभारी प्रधानाचार्य अनिल कुमार पांडे और प्रधान लिपिक पर अपने करीबियों को फर्जी तरीके से नौकरी बांटने का गंभीर आरोप। मामला हाईकोर्ट और सीएम दरबार पहुँचा!
भूतिया दस्तखत’ और 16 महीने बाद फूटा ‘नियुक्ति का जादुई चिराग’: बलिया के बांसडीह इंटर कॉलेज में बैक-डेटिंग का अनोखा करिश्मा!
बलिया:
उत्तर प्रदेश का बलिया ज़िला अपनी क्रांति और बागी तेवरों के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों बलिया का बांसडीह इंटर कॉलेज विद्या का मंदिर कम और 'बैक-डेटिंग और फर्जी दस्तखत की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' ज़्यादा नज़र आ रहा है। यहाँ दस्तावेज़ों की ऐसी हैरतअंगेज़ जादूगरी देखने को मिली है, जिसे देखकर जालसाज़ी के पुराने उस्ताद भी अपना सिर पकड़ लें!
मामला एक ऐसे 'दिव्य चमत्कार' का है, जहाँ एक प्रधानाचार्य महोदय रिटायर होकर आराम फरमाते रहे, और उनके जाने के 16 महीने बाद अचानक कागज़ों पर उनके दस्तखत से नौकरियों की रेवड़ियाँ बंट गईं।
अब ज़रा गणित देखिए—डॉ. हरेराम पाण्डेय 8 अगस्त 2012 से 31 मार्च 2022 तक पूरे 10 साल बेदाग सेवा देकर सम्मानपूर्वक रिटायर हो चुके थे। जिस नियुक्ति प्रक्रिया का उनके 10 साल के पूरे कार्यकाल में दूर-दूर तक कोई वजूद नहीं था, वो उनके रिटायरमेंट के पूरे 16 महीने बाद अचानक फाइलों पर 'जीवंत' हो उठी! यानी रिटायर्ड सर घर बैठकर शायद सपना देख रहे थे और यहाँ कॉलेज में उनके दस्तखत से चहेतों की किस्मत चमक रही थी।
'तिकड़ी' का मास्टरप्लान: अपनों को नौकरी, पूर्व प्रधानाचार्य पर ठीकरा!
जब इस कागज़ी बाजीगरी की तह तक जाने की कोशिश की गई, तो उंगलियाँ सीधे कॉलेज के 'प्रबंधकीय सिंडिकेट' की तरफ उठती हैं। आरोप है कि यह पूरा मास्टरप्लान तीन महारथियों की 'तिकड़ी' ने मिलकर रचा:
संजय कुमार सिंह (प्रबंधक)
अनिल कुमार पांडे (प्रभारी प्रधानाचार्य)
दयानंद पाठक (प्रधान लिपिक)
इन तीनों दिग्गजों ने मिलकर कूटरचित कागजात और फर्जी हस्ताक्षरों के दम पर भर्ती का ऐसा खेल खेला कि अपने सगे-संबंधियों और बेहद करीबियों को 'एडजस्ट' कर दिया। मानो कॉलेज कोई शिक्षा संस्थान न होकर, अपने रिश्तेदारों को सरकारी दामाद बनाने का अड्डा बन चुका हो! और जब इस फर्जीवाड़े का भांडा फूटा, तो बड़ी चालाकी से सारा दोष रिटायर्ड प्रधानाचार्य के माथे मढ़ने की बचकानी नाकाम कोशिश की गई।
हाईकोर्ट से लेकर लखनऊ तक हड़कंप, उड़ी नींदें
कहते हैं कि पाप का घड़ा एक न एक दिन ज़रूर भरता है। इस 'रचनात्मक जालसाज़ी' का संज्ञान अब माननीय उच्च न्यायालय से लेकर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री दरबार तà