नेताजी का 'विशेष' अभियान: शहर में जोड़ने थे नए मतदाता, सात मंडल अध्यक्ष चले बद्रीनाथ से 'पुण्य' कमाने!
भाजपा के विशेष मतदाता जोड़ो अभियान के आखिरी दिन बरेली महानगर इकाई के सात मंडल अध्यक्ष अचानक बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर निकल गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बीच अफसरों और पदाधिकारियों की इस देवभूमि चढ़ाई ने संगठन की अनुशासनप्रियता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब 'वोट' जोड़ने का समय आया, तो नेताजी 'पुण्य' कमाने पहाड़ों पर निकल पड़े!
जनवार्ता लाइव
बरेली:
अनुशासन और कड़े संगठन का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी की महानगर इकाई ने शनिवार को एक ऐसा 'अद्भुत' उदाहरण पेश किया, जिसे देखकर खुद प्रदेश नेतृत्व भी हैरान रह जाए।
एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शीर्ष नेतृत्व संगठन के एक-एक कार्यकर्ता को गले में गमछा डालकर गली-गली नए मतदाता जोड़ने का पाठ पढ़ा रहे थे, तो दूसरी तरफ महानगर के सात महारथी (मंडल अध्यक्ष) अचानक भक्ति भाव में लीन होकर बद्रीनाथ धाम की चढ़ाई चढ़ने निकल पड़े।
अभियान का शनिवार को आखिरी दिन था—यानी 'करो या मरो' का मौका। लेकिन हमारे सात मंडल अध्यक्षों ने शायद सोचा कि ज़मीन पर मतदाता जोड़ने से ज़्यादा ज़रूरी पहाड़ों पर जाकर भगवान से सीधे 'आशीर्वाद' मांगना है!
'देवभूमि' की राह पर निकले 'अनुशासित' सिपाही
यात्रा पर जाने वाले इन 'कर्मठ' पदाधिकारियों की सूची भी कुछ कम दिलचस्प नहीं है:
बांके बिहारी मंडल के मोहित अरोड़ा
पूर्वी मंडल के जयदीप चौधरी
दीनदयाल मंडल के कन्हैया राजपूत
सीबीगंज मंडल के अजय कुमार मौर्य
हरमिलाप मंडल के राजीव कश्यप
साईं नाथ मंडल के बृजेश प्रताप सिंह
मढ़ीनाथ मंडल के सुधीर भटनागर
अभियान के सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन शहर में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने के बजाय इन सात सूरमाओं ने बद्रीनाथ की वादियों में ठंडी हवा खाने का फैसला किया।
सवाल बड़ा है: मतदाता जोड़ने थे या पहाड़ लांघने थे?
राजनीतिक गलियारों में अब दबी ज़बान में नहीं, बल्कि खुलकर ठहाके लग रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब प्रदेश नेतृत्व अभियान की सफलता के लिए दिन-रात एक किए हुए था, तब इन सात अध्यक्षों को अचानक इतनी तीव्र 'आध्यात्मिक अनुभूति' कैसे हो गई?
क्या संगठन की अनुमति से यह पवित्र यात्रा तय हुई थी?
या फिर अध्यक्षों ने सोचा कि जब तक साहब फोन करेंगे, तब तक हम हरिद्वार पार कर चुके होंगे?
अध्यक्ष जी का फोन 'असमर्थ', संगठन की साख 'असहज'
जब इस पूरे 'पवित्र प्रसंग' पर पक्ष जानने के लिए महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनका फोन भी उठना बंद हो गया। शायद वे भी यह सोचने में व्यस्त हैं कि प्रदेश नेतृत्व को इस 'अनोखी निष्ठा' का क्या स्पष्टीकरण दिया जाए!
अब स्थिति यह है कि विरोधी दल चुटकियां ले रहे हैं और संगठन अंदर ही अंदर बगलें झांक रहा है। देखना मजेदार होगा कि बद्रीनाथ धाम से लौटने के बाद इन सात मंडल अध्यक्षों को संगठन में कोई 'विशेष प्रसाद' मिलता है, या यह मामला भी हमेशा की तरह 'ठंडे बस्ते' में विलीन हो जाता है।