आयुष्मान" खाद का अनोखा 'विकास': मिट्टी, कोयले और सरकारी यूरिया के घोल से फसल उगाने की अनोखी 'वैज्ञानिक' कला पर फिरा पानी, मुकदमा दर्ज!

बरेली-बदायूं रोड पर आयुष्मान फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर प्रशासनिक टीम का छापा। सरकारी अनुदानित यूरिया, मिट्टी और कोयले की काली राख मिलाकर 'चमत्कारी' खाद बनाने के गोरखधंधे का पर्दाफाश। एफआईआर (मुकदमा) दर्ज, पढ़िए तीखा और व्यंग्यात्मक विश्लेषण।

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जनवार्ता लाइव।

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बरेली।

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कहते हैं कि "मेहनत का फल मीठा होता है," लेकिन बरेली के बदायूं रोड (करेली ग्राम मार्ग) पर चल रही 'मै० आयुष्मान फर्टिलाइजर प्रा०लि०' ने तो मेहनत का नया और अनोखा रास्ता ही निकाल लिया था! कंपनी के कर्ताधर्ता शायद कृषि विज्ञान के उस सर्वोच्च पुरस्कार के इंतजार में थे, जो मिट्टी, कोयले की राख और सरकारी सब्सिडी वाले यूरिया को मिलाकर किसानों को 'सोना' उगाने का सपना बेचते हैं।  

लेकिन अफसोस! कृषि विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की 'अचानक' जगी नीयत ने इस महान आविष्कार पर पानी फेर दिया।  

काली राख और लाल मिट्टी का 'जादुई' संगम

फैक्ट्री के अंदर जब छापा पड़ा, तो नजारा देखने लायक था। बोरी-दर-बोरी कोयला, मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर और सरकारी अनुदानित (सब्सिडी) यूरिया के लगभग 1200 बैग ऐसे सजे थे मानो कोई गुप्त वैज्ञानिक प्रयोगशाला चल रही हो। पोटाश ड्राइब्ड फ्राम मोलेसेस और PROM (फॉस्फेट रिच आर्गेनिक मैन्योर) के नाम पर जो 'अमृत' थैलियों में पैक हो रहा था, उसमें असल खाद कम और कुदरत की मिट्टी का 'स्वाद' ज्यादा था।  

सरकार किसानों को खाद पर सब्सिडी इसलिए देती है ताकि उनकी फसल लहलहाए, लेकिन यहाँ तो उस सब्सिडी के यूरिया का उपयोग 'रॉ मैटेरियल' की तरह करके मुनाफा कमाने का अनोखा 'बिजनेस मॉडल' चल रहा था।  

फैक्ट्री मालिक 'नदारद', कर्मचारी 'सुपुर्द'

छापेमारी के दौरान जब टीम पहुँची, तो संस्था के मालिक  आयुष अग्रवाल (शायद किसी दूसरे 'वैज्ञानिक' अनुसंधान के सिलसिले में) नदारद थे। मौके पर मिले 1200 बैग यूरिया और अन्य संदिग्ध खादों के नमूने सील कर विभागीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जब तक लैब की रिपोर्ट आएगी, तब तक सुरक्षा का जिम्मा एक स्थानीय महाशय के 'सुपुर्द' कर दिया गया है।  

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