बरेली के इमामबाड़ा खलील खां पर 10 साल से लगा है ताला: हाईकोर्ट सख्त, सुन्नी वक्फ बोर्ड को 6 माह में विवाद सुलझाने का दिया निर्देश

बरेली के किला थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक इमामबाड़ा खलील खां में पिछले 10 वर्षों से ताला बंद है। दो पक्षों के विवाद के बीच अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को छह महीने के भीतर मामले का अंतिम निस्तारण करने का आदेश दिया है।

बरेली के इमामबाड़ा खलील खां पर 10 साल से लगा है ताला: हाईकोर्ट सख्त, सुन्नी वक्फ बोर्ड को 6 माह में विवाद सुलझाने का दिया निर्देश
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10 साल से बंद है इमामबाड़ा खलील खां का ताला, इबादत की आस में अकीदतमंद; इलाहाबाद हाईकोर्ट का वक्फ बोर्ड को बड़ा निर्देश

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बरेली।

शहर के किला थाना क्षेत्र स्थित मलकपुरा का ऐतिहासिक 'इमामबाड़ा खलील खां' पिछले करीब एक दशक से वीरान पड़ा है। अकीदत और इबादत के इस केंद्र पर पिछले 10 वर्षों से ताला लटका हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की धार्मिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं। दो पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है।

क्या है पूरा मामला?

इमामबाड़ा खलील खां सुन्नी वक्फ बोर्ड में 'वक्फ संख्या 2092' और 'दफा 37' के तहत पुश्तैनी 'आस्ताने-अहल-ए-खैर' के रूप में दर्ज है। याचिकाकर्ता आसिफ नूर का आरोप है कि दूसरे पक्ष के नसीम और रेहान ने इमामबाड़े में गैर-कानूनी तरीके से ताला लगा रखा है। तालेबंदी की वजह से अकीदतमंदों का आना-जाना बंद है और वे नज़र-नियाज़, इबादत व अन्य धार्मिक रस्में अदा नहीं कर पा रहे हैं।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 6 माह का अल्टीमेटम

सुन्नी वक्फ बोर्ड में लंबे समय से लंबित इस मामले का निस्तारण न होने पर आसिफ नूर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मंगलवार को अपने निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में वक्फ दस्तावेजों और अदालती आदेश की प्रति दिखाते हुए आसिफ नूर ने बताया कि हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को इस मामले की सुनवाई पूरी कर छह महीने के भीतर अंतिम निस्तारण करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार

प्रेस वार्ता के दौरान याचिकाकर्ता ने प्रशासन और वक्फ बोर्ड से जल्द से जल्द इमामबाड़े का ताला खुलवाने की मांग की ताकि धार्मिक कार्यक्रम पुनः शुरू हो सकें।

हालाँकि, इस पूरे मामले में अभी तक दूसरे पक्ष (नसीम और रेहान) की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरे पक्ष का रुख साफ होने के बाद ही इस बहुचर्चित विवाद के सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।