एक पेड़ मां के नाम' अभियान की धज्जियां! बरेली के मिशन कम्पाउंड में पार्षद की दबंगई, बिना अनुमति उखाड़ फेंका परिवार का पेड़

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित मिशन कम्पाउंड क्षेत्र से पार्षद की गुंडागर्दी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक ओर देश भर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पार्षद के पति राहुल दास (पति माधुरी दास) ने दबंगई दिखाते हुए एक परिवार द्वारा घर के बाहर लगाए गए हरे-भरे पेड़ को उखाड़ फेंका। न तो पीड़ित परिवार से सहमति ली गई और न ही वन विभाग से कोई अनुमति। इस तानाशाही रवैये को लेकर इलाके में भारी आक्रोश है। पढ़ें पूरी खबर...

एक पेड़ मां के नाम' अभियान की धज्जियां! बरेली के मिशन कम्पाउंड में पार्षद की दबंगई, बिना अनुमति उखाड़ फेंका परिवार का पेड़
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पर्यावरण अभियान को ठेंगा! बरेली में पार्षदपति की दबंगई: बिना अनुमति उखाड़ा परिवार का पेड़, लोगों में भारी रोष

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बरेली।

एक तरफ जहां प्रदेश और देश भर में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए "एक पेड़ मां के नाम" जैसे बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनता के नुमाइंदे ही इन हरी-भरी टहनियों के दुश्मन बने बैठे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मिशन कम्पाउंड क्षेत्र से सामने आया है, जहां सत्ता और पद के नशे में चूर पार्षद की दबंगई का खौफनाक चेहरा देखने को मिला है।

मिली जानकारी के अनुसार, मिशन कम्पाउंड स्थित एक पीड़ित परिवार ने अपने घर के बाहर बड़े प्यार और जतन से एक पौधा लगाया था, जो धीरे-धीरे पेड़ का रूप ले रहा था। लेकिन लगभग दो दिन पहले पार्षद माधुरी दास के पति राहुल दास ने अपनी कथित दबंगई और रसूख का ढोल पीटते हुए उस पेड़ को जड़ से उखाड़ फेंका।

न परिवार की रजामंदी, न वन विभाग की एनओसी

हैरानी और गुस्से की बात यह है कि इस कृत्य के लिए न तो घर के चिरागों (परिवारजनों) से कोई इजाजत ली गई और न ही कानून का पालन करते हुए वन विभाग से किसी प्रकार की अनुमति (NOC) हासिल की गई। अपनी मनमर्जी और गुंडागर्दी के बल पर हरे-भरे पेड़ की बलि चढ़ा दी गई।

खोखले साबित हो रहे जिम्मेदार प्रशासनिक दावे

जहां सरकार हर नागरिक को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा सरेआम नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाना प्रशासन के दावों पर कड़ा तमाचा है। पीड़िता परिवार और स्थानीय निवासियों का कहना है कि पेड़ से किसी को कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन केवल अपनी हनक और दबंगई कायम करने के उद्देश्य से यह तानाशाही भरा कदम उठाया गया।

इस घटना के बाद से पूरे इलाके में पार्षदी और उनके पति के प्रति गहरा आक्रोश है। पीड़ित परिवार अब मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों और वन विभाग से करने की तैयारी में है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और कानून हाथ में लेने वाले इस रसूखदार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।