बच्चों ने संभाली पर्यावरण की कमान: उच्च प्राथमिक विद्यालय पथरा में ई-वेस्ट कलेक्शन कैंपेन का सफल आयोजन, कबाड़ बने गैजेट्स से दिया स्वच्छता का संदेश
आलमपुर जाफराबाद (बरेली) के उच्च प्राथमिक विद्यालय पथरा में ई-वेस्ट कलेक्शन कैंपेन का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने पुराने मोबाइल, चार्जर व इलेक्ट्रॉनिक्स जुटाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
जनवार्ता लाइव
बरेली।
तकनीक के इस दौर में जहाँ हर घर में टूटे-फूटे मोबाइल, खराब चार्जर और उलझे हुए तार कबाड़ बनकर पड़े रहते हैं, वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय पथरा के नन्हें-मुन्नों ने इस 'डिजिटल कचरे' से पर्यावरण को बचाने की एक अनूठी और अनुकरणीय पहल की है।
शनिवार, 1 अगस्त 2026 को विद्यालय प्रांगण में 'ई-वेस्ट कलेक्शन कैंपेन' का भव्य एवं सफलतापूर्ण आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान में न केवल स्कूली छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि शिक्षकों और गाँव के अभिभावकों ने भी कदम से कदम मिलाकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
घर-घर से निकाला 'डिजिटल कबाड़'
अभियान की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को ई-वेस्ट से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। इसके बाद उत्साही बच्चों ने अपने-अपने घरों और आसपास से अनुपयोगी पड़े पुराने मोबाइल, बेकार चार्जर, ईयरफोन, उलझी हुई तारें, पुरानी बैटरियाँ, कीबोर्ड, माउस तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एकत्रित किए।
शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि कैसे प्लास्टिक और भारी धातुओं से बने ये उपकरण यदि खुले में फेंक दिए जाएँ, तो ये हवा, पानी और मिट्टी को जहरीला बना देते हैं।
वैज्ञानिक निस्तारण और रिसाइक्लिंग पर जोर
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों एवं मुख्य वक्ताओं ने बच्चों को ई-वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के महत्व से अवगत कराया। विद्यालय में एकत्रित किए गए संपूर्ण ई-वेस्ट को सूचीबद्ध कर अधिकृत पुनर्चक्रण संस्था (अधिकृत रीसाइक्लिंग सेंटर) को सौंपने हेतु सुरक्षित रूप से अलग रखा गया है।
अभिभावकों ने भी सराहा प्रयास
कैंपेन में मौजूद अभिभावकों ने बच्चों के इस नवाचार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने माना कि इस तरह के अभियानों से न केवल घर की सफाई होती है, बल्कि बच्चों में जिम्मेदार नागरिकता और सतत विकास की सोच भी विकसित होती है।
"यह केवल कचरा इकट्ठा करने का अभियान नहीं था, बल्कि भविष्य को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में उठाया गया एक सार्थक कदम था।" — सारिका सक्सेना, प्रधानाध्यापिका