रेलकर्मियों का फूटा गुस्सा: 107 घंटे की ड्यूटी, पीने का पानी तक नहीं! 15 दिन में सुधार नहीं तो बरेली यार्ड में थमेगा काम
बरेली यार्ड में रेलवे प्रशासन की घोर अनदेखी ने कर्मचारियों की कमर तोड़ दी है। एक कर्मचारी से लिया जा रहा दो का काम, ऊपर से पीने को शुद्ध पानी तक नहीं। NRMU ने DRM को ज्ञापन सौंपकर दी 'काम रोको' आंदोलन की खुली चेतावनी।
मशीन की तरह पिस रहे रेलकर्मी, प्रशासन बेखबर
जनवार्ता लाइव
बरेली।
जो ट्रेनें आपको समय पर मंजिल तक पहुँचाती हैं, क्या आपने कभी सोचा है कि उन्हें चलाने वाले रेलकर्मी किस हाल में हैं? इज्जतनगर मंडल के बरेली यार्ड में इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल है, जहाँ रेलवे प्रशासन की अनदेखी ने कर्मचारियों को इंसान से मशीन बना दिया है। लगातार बढ़ता काम का बोझ और सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खोखले वादे! अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया है। नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) ने सीधे तौर पर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को अल्टीमेटम दे दिया है— "समस्याएं सुलझाओ, वरना काम रोक देंगे।"
क्या हैं रेलकर्मियों के 3 सबसे बड़े दर्द?
1. एक सैलरी, दो लोगों का काम:
यूनियन का सबसे बड़ा आरोप है कि प्रशासन कर्मचारियों को निचोड़ रहा है। पहले यार्ड में शंटिंग का अहम काम 'यार्ड मास्टर' करते थे। लेकिन अब यह पूरी जिम्मेदारी DYSS/Mains और DYSS/DA के कंधों पर डाल दी गई है। नतीजा? एक कर्मचारी दो लोगों का काम कर रहा है। इस भयानक तनाव के चलते कर्मचारी ब्लड प्रेशर (BP) और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
2. प्यासे गले और 107 घंटे की ड्यूटी:
क्या आप लगातार 4 रातें जागकर 107 घंटे तक काम कर सकते हैं? बरेली यार्ड के स्टेशन मास्टर, शंटिंग और TNC स्टाफ यही भुगत रहे हैं। रेलवे बोर्ड के 8 घंटे के मानवीय रोस्टर की यहाँ धज्जियां उड़ रही हैं। हद तो तब हो जाती है जब परसाखेड़ा से लेकर पीतांबरपुर तक कर्मचारियों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं होता। पावर केबिन और TRD डिपो तप रहे हैं, लेकिन वहां न आरओ वाटर कूलर है और न ही कोई एसी-कूलर।
3. अपनी मर्जी के नियम:
ट्रेन मैनेजरों को उनके तय कार्यक्षेत्र से बाहर के काम सौंपे जा रहे हैं, जिससे न केवल कर्मचारियों में रोष है, बल्कि रेल संचालन की सुरक्षा (Safety) पर भी बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
15 दिन का अल्टीमेटम: "वरना थम जाएंगे पहिए"
नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। यूनियन ने रेलवे प्रशासन को 15 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
यार्ड मास्टरों की तैनाती तुरंत बहाल हो।
कर्मचारियों के लिए 8 घंटे का मानवीय रोस्टर लागू किया जाए।
सभी जरूरी जगहों पर आरओ (RO) और एसी-कूलर लगाए जाएं।
यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ, तो बरेली यार्ड में गेट मीटिंग और धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। बात यहीं नहीं रुकेगी, जरूरत पड़ने पर 'काम रोको' आंदोलन किया जाएगा, जिससे ट्रेनों की रफ्तार थम सकती है।
अब गेंद रेलवे प्रशासन के पाले में है। देखना यह है कि प्रशासन कर्मचारियों की सुध लेता है या फिर बरेली यार्ड किसी बड़े आंदोलन का अखाड़ा बनता है।