विवादित कार्यप्रणाली, फर्जीवाड़े के आरोप और पुलिस केस... फिर भी कुर्सी की 'सेटिंग'! क्या आलमपुर जाफराबाद में दोबारा होगी विवादास्पद BEO की वापसी?
मानव संपदा पोर्टल पर उम्र में अजीबोगरीब खेल, शिक्षिकाओं के उत्पीड़न के आरोप, 10% कमीशनखोरी की शिकायतें और पुलिस में जान का खतरा बताकर दी गई तहरीर—विवादों के पर्याय बने पूर्व बीईओ मुकेश कमल भारती अब जिला व राज्य मुख्यालय से सेटिंग कर दोबारा कुर्सी पर लौटने की फिराक में हैं। जानिए अखबारों की कटिंग में दर्ज वो कड़वे सच, जो उनके पिछले कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
जनवर्ता लाइव
बरेली / आलमपुर जाफराबाद:
शिक्षा विभाग में प्रशासनिक निष्पक्षता और शुचिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी मुकेश कमल भारती, जिनका पिछला कार्यकाल विवादों, विभागीय अनियमितताओं और संगीन आरोपों से घिरा रहा, अब एक बार फिर अपनी पुरानी कुर्सी हथियाने की जोड़-तोड़ में जुट गए हैं। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, महोदय जिला मुख्यालय से लेकर राज्य मुख्यालय तक 'विशेष सेटिंग' के जरिए फिर से इसी ब्लॉक में तैनाती पाने का ताना-बाना बुन रहे हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा विभाग ऐसे अधिकारी के दागदार अतीत को अनदेखा कर फिर से वही पुरानी गलती दोहराने जा रहा है? आइए नजर डालते हैं उन पुख्ता और अभिलेखीय प्रमाणों पर, जो अखबारों की सुर्खियों में छाए रहे थे:
1. 10 साल की उम्र में 10वीं पास का अनोखा 'कारनामा' (मानव संपदा पोर्टल का खेल)
मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज बीईओ मुकेश कमल भारती के सरकारी सेवा विवरण में एक हास्यास्पद और गंभीर गड़बड़ी सामने आई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 10 वर्ष की आयु में 10वीं, 12 वर्ष की आयु में इंटरमीडिएट और 16 वर्ष की आयु में स्नातक पूरा कर सरकारी नौकरी हासिल कर ली! पोर्टल पर वर्षों तक चली इस गड़बड़ी को न तो खुद बीईओ ने ठीक कराने की जहमत उठाई और न ही विभाग ने। जब मामला मीडिया में उछला, तब जाकर सफाई दी गई कि पोर्टल पर डेटा गलत दर्ज है। सवाल यह है कि एक जिम्मेदार अधिकारी ने इतने सालों तक अपनी सर्विस बुक के इस भारी झोल पर खामोशी क्यों साधे रखी?
2. शिक्षिका के वेतन पर ताला और देर रात फोन करने के गंभीर आरोप
विभागीय सीमाओं के उल्लंघन का दूसरा बड़ा मामला तब सामने आया जब एक पीड़िता शिक्षिका के पति ने मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई। आरोप था कि चिकित्सा अवकाश पर चल रही शिक्षिका का जबरन वेतन रोका गया। आरोप यह भी था कि चाइल्ड केयर लीव के दौरान रात 10 बजे के बाद शिक्षिका को फोन कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और बीआरसी पर प्रशिक्षण का अनुचित दबाव बनाया गया।
3. कंपोजिट और स्पोट्र्स ग्रांट में 10% 'कमीशन' का कट
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के जिलाध्यक्ष भानू प्रताप सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों ने बीएसए से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आलमपुर जाफराबाद सहित अन्य क्षेत्रों में बेसिक स्कूलों को मिलने वाली कंपोजिट और स्पोट्र्स ग्रांट में से सीधे 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान वसूली और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर शिक्षकों को प्रताड़ित करने की कार्यप्रणाली की गूंज पूरे ब्लॉक में चर्चा का विषय बनी हुई थी।
4. खुद को 'खतरा' बताकर पुलिस में दी तहरीर
अपनी विवादित कार्यप्रणाली और शिक्षकों से टकराव के बाद बीईओ ने स्वयं भमोरा थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उन्हें भ्रमण के दौरान जान का खतरा है और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। जिस अधिकारी के कार्यकाल में शिक्षक मानसिक भय और प्रताड़ना के साये में रहे हों, वे खुद पुलिस के दरवाजे तक जा पहुंचे थे।
बड़ा सवाल: क्या फिर 'सेटिंग' से मिलेगी कुर्सी?
अपनी अमर्यादित कार्यप्रणाली, वित्तीय अनियमतताओं की शिकायतों और शिक्षकों के भारी असंतोष के बावजूद, अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुकेश कमल भारती दोबारा आलमपुर जाफराबाद में ही तैनाती पाने के लिए शीर्ष स्तर पर जोर-जमाव कर रहे हैं।
यदि ऐसे विवादित इतिहास वाले अधिकारी को पुनः वही जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह न केवल ब्लॉक के शिक्षकों का मनोबल तोड़ेगा, बल्कि शासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। देखना यह है कि उच्च अधिकारी इन साक्ष्यों और पूर्व की शिकायतों का संज्ञान लेते हैं या 'सेटिंग का खेल' एक बार फिर प्रशासनिक मर्यादाओं पर भारी पड़ता है।