दागी बीईओ की फिर 'सेटिंग', बीएसए दफ्तर की मेहरबानी या भ्रष्ट तंत्र का सरंक्षण?
आलमपुर जाफराबाद में विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे खंड शिक्षा अधिकारी की फिर से उसी ब्लॉक में वापसी की सुगबुगाहट से हड़कंप मच गया है।
जनवार्ता लाइव
बरेली।
शिक्षा महकमे में ईमानदारी की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जब कुर्सी और मलाईदार पोस्टिंग का खेल शुरू होता है, तो सारे नियम-कायदे और नैतिकता धरी की धरी रह जाती है। आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में एक बार फिर वही पुराना खेल दोहराने की पटकथा लिखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो गंभीर आरोपों, विवादों और शिक्षकों के उत्पीड़न के लिए चर्चित रहे एक खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की दोबारा उसी ब्लॉक में वापसी कराने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर 'उच्च स्तरीय सेटिंग' का खेल चालू है।
कमीशनखोरी, बदसलूकी और उत्पीड़न का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड
यह वही बीईओ साहब हैं जिन पर कंपोजिट और स्पोर्ट्स ग्रांट में खुलेआम 10 प्रतिशत कमीशन मांगने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। शिक्षक संगठनों ने बाकायदा बीएसए से शिकायत कर इस उगाही की जांच की मांग की थी। सिर्फ इतना ही नहीं, मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए पूर्व में एक शिक्षक पर जूता चलाने जैसा शर्मनाक कृत्य करने और महिला शिक्षिकाओं के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों से भी इनका नाम जुड़ चुका है। चिकित्सीय अवकाश पर चल रही शिक्षिकाओं को आधी रात में फोन कर परेशान करने से लेकर उनका वेतन रोकने जैसे कारनामों की गूंज मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच चुकी है।
पोर्टल पर दर्ज फर्जीवाड़ा और ढुलमुल तंत्र
इतना ही नहीं, मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज विवरण के अनुसार इन्होंने महज 10 वर्ष की उम्र में 10वीं, 12 वर्ष में इंटरमीडिएट और 16 वर्ष की आयु में स्नातक की परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हथिया ली। वर्षों से पोर्टल पर दर्ज इस गंभीर गड़बड़ी पर बीएसए कार्यालय की खामोशी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। जब विभाग के कागजों में ही इतनी बड़ी हेराफेरी दर्ज हो और उच्चाधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहें, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही कहें या फिर अंदरूनी साठगांठ?
सवाल बीएसए की भूमिका और नीयत पर
क्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को ऐसे दागी और विवादित अधिकारी की करतूतों की जानकारी नहीं है?
जिस अधिकारी पर कमीशनखोरी, शिक्षकों से मारपीट और अभद्रता के आरोप हों, उसे दोबारा उसी ब्लॉक की कमान सौंपने की क्या मजबूरी है?
क्या जिला मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार अफसर सिर्फ कागजी खानापूर्ति और 'सेटिंग' के दम पर शिक्षा व्यवस्था की साख की बलि चढ़ाने को तैयार हैं?
शिक्षक समुदाय में इस वापसी की चर्चा मात्र से भारी रोष और डर का माहौल है। अगर ऐसे विवादित अधिकारी को दोबारा उसी स्थान पर तैनात किया जाता है, तो यह न केवल विभाग की साख पर गहरा धब्बा होगा, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की भी सरेआम धज्जियां उड़ेगी।